Monday, March 30, 2009

31 March, Meena Kumari Death anniversary, Died on 3/31/1972,, at the age of 40....



On this very day (March 31st), 37 years ago, Indian cinema lost one of its most talented actresses and her sudden departure left a void which was hard to fill. We pay our respects to the legendary Meena Kumari on her death anniversary.

Wednesday, February 25, 2009

Chaand Apna Safar



चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

दिल में यादों के नश्तर से टूटा किये
एक तमन्ना कलेजा मसलती रही
चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

बदनसीबी शराफत की दुश्मन बनी
सज संवार्के भी दुल्हन न दुल्हन बनी
टीका माथे पे एक दाग बनता गया
मेंहदी हाथों से शोले उगलती रही

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

ख्वाब पलकों से गिर कर फनाह हो गए
दो क़दम चल के तुम भी जुदा हो गए
मेरी हारी थकी आँख से रात दिन
एक नदी आंसुओं की उबलती रही

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

सुबह मांगी तोह ग़म का अँधेरा मिला
मुझको रोता सिसकता सवेरा मिला
मैं उजालों की नाकाम हसरत लिए
उम्र भर मोम बन कर पिघलती रही

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

चाँद यादों की पर्च्चैयों के सिवा
कुच्छ भी पाया न तनहाइयों के सिवा
वक़्त मेरी तबाही पे हँसता रहा
रंग तकदीर क्या क्या बदलती रही

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

दिल में यादों के नश्तर से टूटा किये
एक तमन्ना कलेजा मसलती रही

चाँद अपना सफ़र ख़त्म करता रहा
शमा जलती रही रात ढलती रही

yuu.N terii rahaguzar se diivaanaavaar guzare


यूँ तेरी रहगुज़र से दीवानावार गुज़रे
काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे

बैठे रहे हैं रास्ता में दिल का खंडहर सजा कर
शायद इसी तरफ से एक दिन बहार गुज़रे

बहती हुई ये नदिया घुलते हुए किनारे
कोई तो पार उतारे कोई तो पार गुज़रे
तू ने भी हम को देखा हमने भी तुझको देखा
तू दिल ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे

ye raat ye tanhaa_ii



ये रात ये तन्हाई
ये दिल के धड़कने की आवाज़
ये सन्नाटा

ये डूबते तारों की खामोश ग़ज़लख्वानी
ये वक़्त की पलकों पर सोती हुई वीरानी
जज़्बात -इ -मुहब्बत की ये आखिरी अन्गादाई
बजती हुई हर जानिब ये मौत की शाहानाई

सब तुम को बुलाते हैं पल भर को तुम आ जाओ
बंद होती मेरी आँखों में मुहब्बत का इक ख्वाब सजा जाओ

puuchhate ho to suno kaise basar hotii hai


पूछते हो तो सुनो कैसे बसर होती है
रात खैरात की i सदके की सहर होती है

सांस भरने को तो जीना नहीं कहते या रब
दिल ही दुखता है न अब आस्तीन तर होती है

जैसे जागी हुई आँखों में चुभे कांच के ख्वाब
रात इस तरह दीवानों की बसर होती है

गम ही दुश्मन है मेरा गम ही को दिल धून्धता है
एक लम्हे की जुदाई भी अगर होती है

एक मरकज़ की तलाश एक भटकती खुश्बू
कभी मंजिल कभी तम्हीद -अ-सफ़र होती हा i

chaa.Nd tanhaa hai aasmaa.N tanhaa


चाँद तनहा है आसमान तनहा
दिल मिला है कहाँ कहाँ तनहा

बुझ गई आस छुप गया तारा
थार थराता रहा धुंआ तनहा

जिंदगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तनहा है और जान तनहा

हमसफ़र कोई गर मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे तनहा तनहा

जलती बुझती सी रौशनी के परे
सिमटा सिमटा सा एक मकान तनहा

राह देखा करेगा सदियों तक
छोड़ जायेंगे ये जहां तनहा

aaGaaz to hotaa hai anjaam nahii.n hotaa



आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
जब जुल्फ की कालिख में घुल जाए कोई रही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता
हंस हंस के जवान दिल के हम क्यों न चुनें तुकडे
हर शख्स की किस्मत में इनाम नहीं होता
बहते हुए आंसू ne आँखों से कहा थम कर
जो मई से पिघल जाए वो जाम नहीं होता
दिन दूबे हैं या डूबी बरात लिए कश्ती
साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता